अंदर आते ही मुझे यहाँ इतने सारे विदेशियों को देखकर थोड़ी हैरानी हुई। माहौल सचमुच वैश्विक था... लेकिन शायद इसलिए कि सबके चेहरे और लहजे में उत्साह था, मुझे बिना किसी वजह के ही अपनापन महसूस हुआ? काउंसलिंग सेंटर के मैनेजर और सभी कर्मचारियों ने आपस में बातचीत को इतना सहज बना दिया कि कोई असहजता महसूस नहीं हुई। निदेशक का लहजा और व्यवहार भी बहुत सौम्य और दयालु था, जिससे मुझे सुकून मिला।